रविवार, 14 अक्टूबर 2012

सपने सिर्फ देखे नहीं जिए जाते हैं: कलाम (जन्मदिन विशेष )


नई दिल्ली। सपने वो नहीं होते जिन्हें हम रात को देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने ही नहीं देते, ऐसी सोच रखने वाले शख्सियत डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम का सोमवार को 81वां जन्मदिन है। कलाम साहब अपने पूरे जीवन में इसी सोच के साथ चलते रहे हैं। जो सपना उन्होंने बचपन में देखा उसे सिर्फ देखा ही नहीं बल्कि उस सपने को साकार करने के लिए प्रबल प्रयास भी किए। उस सपने के साथ वह रोज जीते रहे तब जाकर आज वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
असीम व्यक्तित्व
भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे कलाम का व्यक्तित्व सम्मोहक बहुपक्षीय है। उनकी पहचान बस रामेश्वरम के एक अनजान ग्रामीण लड़के से राष्ट्रपति भवन की यात्रा तक सीमित नहीं हैं। वह बचपन से ही मानवीयता तथा आध्यात्मिकता से प्रेरित रहे। उन्होंने अपने जीवन में सपनों को साकार करने का प्रयत्न किया और सफलता ने उनका दामन नहीं छोड़ा। 'मिसाइल पुरुष' नाम से मशहूर डॉ. कलाम के एक निकट सहयोगी श्री आर. रामनाथन उनके बारे में बताते हैं कि डॉ. कलाम हमेशा आकाश की ऊंचाइयों तक पहुंचने के इच्छुक रहे हैं।
वैज्ञानिक से पहले एक इंसान
कलाम एक गैर राजनीतिक व्यक्ति रहे हैं। विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही राष्ट्रपति भवन के द्वार इनके लिए खुद ही खुल गए। जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसकेलिए सब सहज हो जाता है और कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत है की उन्हें सभी धर्म, जाति एवं संप्रदायों के व्यक्ति समान ही नजर आते हैं। उनके लिए मानवता सबसे बड़ा धर्म हैं। एक बार एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि अगर मनुष्य अच्छा होगा तो वह किसी भी क्षेत्र में अव्वल हो सकता है। उसमें सारे गुण अपने आप ही आ जाते हैं।

जन्म एवं पहचान
इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम तमिलनाडु में हुआ। द्वीप जैसा छोटा सा शहर प्राकृतिक छटा से भरपूर था। शायद इसलिए कलाम प्रकृति के काफी करीब हैं। कलाम अपने परिवार में काफी लाडले थे, लेकिन उनका परिवार छोटी-बड़ी मुश्किलों से हमेशा ही जूझता रहता था। एक बार कलाम भाई-बहनों के साथ खाना खा रहे थे। तब कलाम की मां ने कलाम को ज्यादा रोटियां दे दी, तभी उनके भाई ने उन्हें बताया कि मां के लिए रोटियां नहीं बची हैं, रोटियां कम पड़ गई हैं। उन लोगों के लिए यह काफी कठिन समय था। कलाम अपने जज्बातों पर काबू नहीं कर पाएं और अपनी मां को गले लगाने के लिए दौड़ गए। उन्हें बचपन में ही अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो गया था। उस वक्त उनके घर में बिजली नहीं हुआ करती थी और वह केरोसिन तेल का दीपक जलाकर पढ़ाई किया करते थे। कलाम अपनी मां से ही प्रेरणा लेते थे।
जब यह मात्र 19 वर्ष के थे, तब द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को भी महसूस किया। युद्ध की आग रामेश्वरम के द्वार तक पहुंच गई थी। इन परिस्थितियों में भोजन सहित सभी आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो गया था। कलाम एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आए, तो इसके पीछे उनके पांचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रहमण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी। अध्यापक की बातों ने उन्हें जीवन के लिए एक मंजिल और उद्देश्य भी प्रदान किया। अभियात्रिकी की शिक्षा के लिए उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जॉयन किया। वहां उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का चुनाव किया।

राजनीतिक सफर
कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं हैं लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से संपन्न माना जा सकता है। इन्होंने अपनी पुस्तक इंडिया 2020 में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते हैं और इसके लिए उनके पास एक कार्य योजना भी है। परमाणु हथियारों के क्षेत्र में यह भारत को सुपर पॉवर बनाने की बात सोचते रहे हैं। वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते हैं। डॉक्टर कलाम का कहना है कि सॉफ्टवेयर का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभावित हो सकें ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा। वैसे इनके विचार शाति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं। इस संबंध में इन्होंने कहा है-2000 वर्षो के इतिहास में भारत पर 600 वर्षो तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शाति की स्थिति होना आवश्यक है।

राष्ट्रपति का सफर
कलाम भारत के बारहवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एनडीए घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई, 2002 को कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे। इनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। राजग में इनके नाम के प्रति सहमति न हो पाने के कारण यह दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनाए जा सके। कलाम व्यक्तिगत जिंदगी में बेहद अनुशासनप्रिय हैं। इन्होंने अपनी जीवनी विंग्स ऑफ फायद भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है। इनकी दूसरी पुस्तक गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ द पर्पज ऑफ लाइफ आत्मिक विचारों को दर्शाती हैं, इन्होंने तमिल भाषा में कविताएं भी लिखी हैं। दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफी मांग है।

विशेषताएं
कलाम ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही प्राप्त हुआ है, अन्य दो राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉक्टर जाकिर हुसैन हैं।
यह प्रथम वैज्ञानिक हैं जो राष्ट्रपति बने हैं और प्रथम राष्ट्रपति भी हैं जो अविवाहित हैं।
इसके अतिरिक्त कलाम ही ऐसे एकमात्र व्यक्ति हैं जो राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद अभी जीवित हैं। इनके पूर्व के सभी राष्ट्रपति अब इस संसार में नहीं हैं।
एक राष्ट्रपति के अलावा वह एक आम इन्सान के तौर पर वह युवाओं की पहली पसंद और प्रेरक हैं। उनके बातें, उनका व्यक्तित्व, उनकी पहचान न केवल एक राष्ट्रपति के रूप में हैं बल्कि जब भी लोग खुद को कमजोर महसूस करते हैं कलाम का नाम ही उनके लिए प्रेरणा बन जाता है।

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